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सेवा से संकल्प’ के नाम पर सरकारी स्कूलों के राजनीतिकरण पर रोक लगे, सूर्यकांत धस्माना ने मुख्य सचिव को लिखा पत्र

देहरादून : उत्तराखंड प्रदेश कांग्रेस कमेटी के वरिष्ठ उपाध्यक्ष सूर्यकांत धस्माना ने प्रदेश के मुख्य सचिव को पत्र लिखकर ‘सेवा से संकल्प’ कार्यक्रम के नाम पर राजकीय, अशासकीय सहायता प्राप्त एवं निजी विद्यालयों में राजनीतिक गतिविधियों को बढ़ावा देने तथा विद्यालयों के राजनीतिकरण के प्रयासों पर तत्काल रोक लगाने की मांग की है।

सूर्यकांत धस्माना ने अपने पत्र में कहा है कि प्रदेश में ‘सेवा से संकल्प’ कार्यक्रम के नाम पर राजकीय, अशासकीय सहायता प्राप्त एवं निजी विद्यालयों को एक विशेष राजनीतिक विचारधारा एवं दल के प्रचार-प्रसार से जोड़ने के प्रयास लगातार किये जा रहे हैं। विद्यालय शिक्षा एवं बच्चों के भविष्य निर्माण के पवित्र केंद्र हैं, इन संस्थानों का उपयोग किसी भी राजनीतिक दल के प्रचार-विचारधारा के प्रचार के लिए किया जाना अत्यंत गंभीर एवं आपत्तिजनक है।

उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री के जन्म दिवस पर मनाये जा रहे ‘सेवा से संकल्प’ कार्यक्रम की आड़ में सत्ताधारी दल सरकारी एवं अशासकीय सरकारी सहायता प्राप्त व निजी स्कूलों का भगवाकरण करने का प्रयास कर रहा है और स्कूलों पर इसके लिए दबाव बनाया जा रहा है, जिसके लिए विभागीय अधिकारियों के माध्यम से निर्देश जारी किये जा रहे हैं कि ‘सेवा से संकल्प’ कार्यक्रम के लिये भारतीय जनता पार्टी के नेता कार्यकर्ताओं को मुख्य अतिथि के रूप में आमंत्रित करना अनिवार्य है। धस्माना* ने खंड शिक्षा अधिकारी रायपुर, देहरादून का प्रधानाचार्यों के नाम संबोधित आदेश पत्रांक संख्या विविध/1077-78/सेवा संकल्प अभियान/2026-27, दिनांक 22 सितम्बर 2026 संलग्न करते हुए मुख्य सचिव से मांग की है कि –

1. ‘सेवा से संकल्प’ कार्यक्रम के नाम पर राजकीय, अशासकीय सहायता प्राप्त एवं निजी विद्यालयों में आयोजित किए जा रहे सभी कार्यक्रमों की निष्पक्ष जांच कराई जाए।

2. यह स्पष्ट निर्देश जारी किए जाएं कि प्रदेश के किसी भी विद्यालय परिसर, सरकारी भवन अथवा सरकारी संसाधन का उपयोग किसी राजनीतिक दल अथवा राजनीतिक संगठन के प्रचार-प्रसार के लिए नहीं किया जाएगा।

3. विद्यालयों में छात्र-छात्राओं एवं शिक्षकों की किसी भी राजनीतिक कार्यक्रम में अनिवार्य अथवा दबावपूर्वक भागीदारी पर तत्काल रोक लगाई जाए।

4. शिक्षा विभाग के अधिकारियों एवं विद्यालय प्रबंधनों को स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी किए जाएं कि विद्यालयों की शैक्षणिक गतिविधियों को किसी भी राजनीतिक दल की गतिविधियों से पृथक रखा जाए।

5. यदि किसी विद्यालय में ‘सेवा से संकल्प’ अथवा इस प्रकार के किसी कार्यक्रम के माध्यम से राजनीतिक प्रचार-प्रसार किए जाने की पुष्टि होती है तो संबंधित अधिकारियों एवं विद्यालय प्रबंधन की जवाबदेही निर्धारित करते हुए नियमानुसार कार्रवाई की जाए।

6. प्रदेश के सभी विद्यालयों में संवैधानिक मूल्यों, धर्मनिरपेक्षता, लोकतांत्रिक भावना एवं राजनीतिक निष्पक्षता सुनिश्चित करने के लिए स्पष्ट आचार-संहिता लागू की जाए।

7. उपरोक्त के संबंध में शासन द्वारा की गई कार्रवाई एवं जारी दिशा-निर्देशों की जानकारी सार्वजनिक की जाए, ताकि जनता एवं अभिभावकों में किसी प्रकार का भ्रम न रहे।

धस्माना* ने कहा कि शिक्षा संस्थान किसी राजनीतिक दल के प्रचार-प्रसार का माध्यम नहीं, बल्कि राष्ट्र एवं समाज के भविष्य निर्माण के केंद्र हैं, अतः सरकार की यह जिम्मेदारी है कि विद्यालयों को राजनीतिक हस्तक्षेप से मुक्त रखते हुए विद्यार्थियों को स्वतंत्र, निष्पक्ष एवं लोकतांत्रिक वातावरण उपलब्ध कराया जाए।

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