देहरादून से एक ऐसी खबर सामने आई है जिससे यही लगता है कि मानों जिंदगी जीना जिंदगी खत्म से ज्यादा मुश्किल है। और मरना बेहद आसान है बड़े-बड़े सपने देखना महंगी महंगी पढ़ाई करना लेकिन उसके बावजूद इतनी जल्दी उम्मीद हार जाना कहीं ना कहीं गलत है। अगर मानसिक तनाव किसी को होता है तो ऐसे में डॉक्टर या पुलिस के मदद लेनी चाहिए ना कि अपनी जिंदगी खत्म करनी चाहिए क्योंकि आपके साथ आपका परिवार है। यह बात हम इसलिए कह रहे हैं क्योंकि देहरादून के पटेल नगर क्षेत्र से एक ऐसा मामले सामने आया है जिसे सबको हिला कर रख दिया है।
दर अगल पटेलनगर क्षेत्र में एक महिला डॉक्टर ने खुदकुशी कर ली. महिला डॉक्टर की पहचान तन्वी के रूप में हुई है. खबर है कि तन्वी ने कार में बैठकर अपनी नसों में जहरीला इंजेक्शन लगाया और कुछ देर बाद डॉक्टर तन्वी की मौत हो गई. घटना की सूचना मिलने के बाद मौके पर पहुंची पुलिस ने कार से दवाओं की खाली शीशियां बरामद की है.
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार मृतका तन्वी पहले भी दो बार आत्महत्या की कोशिश कर चुकी थी. परिजनों ने घटना को लेकर मानसिक उत्पीड़न का आरोप लगाया है. कोतवाली पटेलनगर में परिजनों की शिकायत के आधार पर मुकदमा दर्ज हुआ है. पुलिस हर एंगल से खुदकुशी के मामले की जांच में जुट गई है.
इस मामले में परिजनों ने विभाग की एचओडी पर प्रताड़ित करने का आरोप लगाया है। पुलिस के अनुसार घटना बुधवार तड़के करीब तीन बजे की है। डॉ. तन्वी कारगी रोड पर अपनी कार के अंदर मरणासन्न हालत में मिलीं। उन्हें कार का शीशा तोड़कर बाहर निकाला गया। कार की सीट पर कई इंजेक्शन पड़े हुए थे। परिजन उन्हें श्रीमहंत इन्दिरेश अस्पताल की इमरजेंसी में लेकर पहुंचे, जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया।
डॉ. तन्वी मूल रूप से अंबाला के मॉडल टाउन की रहने वाली थीं और देहरादून में टीएचडीसी कॉलोनी में अपनी मां के साथ रहती थीं। उनके पिता ललित मोहन ने तहरीर में बताया कि उनकी बेटी वर्ष 2023 से एसजीआरआर मेडिकल कॉलेज के नेत्र रोग विभाग में एमएस कर रही थी। दिसंबर 2025 तक सब कुछ ठीक चल रहा था, लेकिन इसके बाद विभाग में नई एचओडी की नियुक्ति हुई।
परिजनों का आरोप है कि नई एचओडी डॉ. प्रियंका गुप्ता ने पहले ही दिन से डॉ. तन्वी को डराना- धमकाना शुरू कर दिया था। इसके बाद से वह मानसिक रूप से परेशान रहने लगी थीं। यह भी आरोप है कि नई एचओडी उन्हें पुरानी एचओडी से बात करने से रोकती थीं। पिता के अनुसार पुरानी एचओडी ने ही उन्हें सर्जरी सिखाई थी, इसलिए वह कभी-कभी उनसे बात कर लेती थीं। इसी द्वेष के चलते नई एचओडी ने डॉ. तन्वी को थिसिस में शून्य अंक दे दिए थे। इसके अलावा एचओडी पर पैसे मांगने का भी आरोप लगाया गया है।







