देहरादून : प्रदेश कांग्रेस की मुख्य प्रवक्ता गरिमा मेहरा दसौनी ने नरेंद्रनगर नगरपालिका चुनाव के दौरान कैबिनेट मंत्री एवं स्थानीय विधायक सुबोध उनियाल के आचरण की कड़ी निंदा करते हुए कहा कि लोकतंत्र में सत्ता का अहंकार संविधान और चुनावी नियमों से ऊपर नहीं हो सकता।
गरिमा मेहरा दसौनी ने कहा कि मतदान के दौरान मंत्री सुबोध उनियाल का प्रोटोकॉल एवं निर्वाचन नियमों की अनदेखी करते हुए मतदान केंद्र के भीतर प्रवेश करना अपने आप में गंभीर मामला है। इससे भी अधिक दुर्भाग्यपूर्ण यह रहा कि जब स्थानीय लोगों और मतदाताओं ने इस पर आपत्ति जताई तो मंत्री महोदय ने संयम और मर्यादा का परिचय देने के बजाय आक्रामक एवं अभद्र व्यवहार किया।
गरिमा ने आरोप लगाया कि महिलाओं के साथ दुर्व्यवहार किया गया, आपत्तिजनक शब्दों का प्रयोग किया गया तथा विरोध कर रहे लोगों के मोबाइल फोन तक छीनने की कोशिश की गई। यदि सत्ता में बैठे मंत्री ही कानून और चुनाव आयोग के नियमों का उल्लंघन करेंगे तो आम जनता से नियमों के पालन की अपेक्षा कैसे की जा सकती है
गरिमा मेहरा दसौनी ने कहा कि भाजपा का “सबका साथ, सबका विकास” का नारा अब “जिसकी लाठी उसकी भैंस” की मानसिकता में बदल चुका है। लोकतंत्र में मतदाता सर्वोपरि होता है, न कि कोई मंत्री या पदाधिकारी। चुनाव प्रक्रिया को प्रभावित करने अथवा मतदाताओं पर दबाव बनाने की किसी भी कोशिश को लोकतंत्र के लिए घातक माना जाना चाहिए।
उन्होंने राज्य निर्वाचन आयोग से पूरे घटनाक्रम का संज्ञान लेने, मामले की निष्पक्ष जांच कराने तथा यदि चुनावी आचार संहिता एवं निर्वाचन नियमों का उल्लंघन हुआ है तो दोषियों के विरुद्ध आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित करने की मांग की।
गरिमा मेहरा दसौनी ने कहा कि कांग्रेस पार्टी लोकतांत्रिक मूल्यों, संविधान और स्वतंत्र एवं निष्पक्ष चुनाव की प्रक्रिया की रक्षा के लिए सदैव आवाज उठाती रहेगी और सत्ता के दुरुपयोग को किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं किया जाएगा।








