साइबर अपराधों की रोकथाम, दूरसंचार सेवाओं के सुरक्षित एवं पारदर्शी उपयोग व फर्जी सिम कार्डों के माध्यम से होने वाले साइबर अपराधों पर प्रभावी अंकुश लगाने के उद्देश्य से वी. मुरुगेशन, अपर पुलिस महानिदेशक, कानून एवं व्यवस्था, उत्तराखण्ड की अध्यक्षता में उत्तराखण्ड पुलिस एवं भारत सरकार के दूरसंचार विभाग (Department of Telecommunications – DoT) के अधिकारियों की एक समन्वय बैठक आयोजित की गई।
बैठक में उत्तराखण्ड पुलिस विभाग की ओर से नीलेश आनन्द भरने, पुलिस महानिरीक्षक, एसटीएफ/साइबर/एएनटीएफ, उत्तराखण्ड, एसटीएफ एसएसपी अजय सिंह, लोकजीत सिंह, पुलिस अधीक्षक एव शांतनु पाराशर, अपर पुलिस अधीक्षक (साइबर) सहित अन्य अधिकारी उपस्थित रहे। दूरसंचार विभाग (DoT) की ओर से राजीव बंसल, उप महानिदेशक (राज्य समन्वय), आदित्य सिंह, उप महानिदेशक (सुरक्षा), लवी गुप्ता, निदेशक (सी), मुदिता चंद्रा, अपर महानिदेशक (सुरक्षा), अनुराग दीपेंद्र गौर, सहायक दूरसंचार अभियंत्रण निदेशक (सुरक्षा) व मीनू कुमारी, कनिष्ठ दूरसंचार अधिकारी (सुरक्षा एवं प्रौद्योगिकी) सहित अन्य अधिकारीगण उपस्थित रहे।
बैठक में साइबर अपराधों के बदलते स्वरूप, दूरसंचार सेवाओं के दुरुपयोग की रोकथाम, फर्जी एवं अनियमित सिम एक्टिवेशन पर प्रभावी नियंत्रण, तकनीकी समन्वय, सूचना के त्वरित आदान-प्रदान तथा संयुक्त प्रवर्तन को सुदृढ़ बनाने के संबंध में विस्तृत विचार-विमर्श किया गया। साथ ही नागरिकों को साइबर अपराधों से सुरक्षित रखने के उद्देश्य से विभिन्न तकनीकी एवं नीतिगत उपायों पर सहमति व्यक्त की गई।
बैठक में संचार साथी पोर्टल के अंतर्गत उपलब्ध विभिन्न नागरिक सेवाओं की विस्तृत जानकारी साझा की गई। बताया गया कि CEIR (Central Equipment Identity Register) के माध्यम से खोए अथवा चोरी हुए मोबाइल फोन को ब्लॉक करने, ट्रेस करने तथा बरामद होने पर पुनः अनब्लॉक करने की सुविधा उपलब्ध है। इसी प्रकार TAF-COP के माध्यम से नागरिक अपने नाम पर जारी सभी मोबाइल कनेक्शनों की जानकारी प्राप्त कर अनधिकृत अथवा फर्जी सिम कार्डों की पहचान कर उन्हें बंद कराने का अनुरोध कर सकते हैं।
नागरिकों को होने वाले प्रमुख लाभ
1. TAF-COP (Know Mobile Connections in Your Name)
• अपने नाम पर जारी सभी मोबाइल कनेक्शनों की जानकारी प्राप्त करना।
• अनधिकृत अथवा संदिग्ध मोबाइल नंबरों की रिपोर्ट करना।
• आवश्यकता होने पर ऐसे मोबाइल कनेक्शनों को बंद कराने का अनुरोध करना।
2. CEIR (Central Equipment Identity Register)
• खोए अथवा चोरी हुए मोबाइल फोन को ब्लॉक करना।
• मोबाइल प्राप्त होने पर उसे पुनः अनब्लॉक कराना।
• IMEI के माध्यम से मोबाइल की वर्तमान स्थिति ट्रैक करना।
• ब्लॉक किए गए मोबाइल के पुनः नेटवर्क पर सक्रिय होने की सूचना प्राप्त करना।
3.Chakshu (चक्षु)
• संदिग्ध कॉल, SMS, WhatsApp संदेश अथवा साइबर धोखाधड़ी के प्रयासों की रिपोर्ट करना।
• फर्जी KYC, बैंक अधिकारी, पुलिस अधिकारी, बिजली बिल, निवेश, लॉटरी, पार्सल एवं डिजिटल अरेस्ट जैसी साइबर धोखाधड़ी की शिकायत दर्ज कराना।
4. Suspected Fraud Communication Reporting
• साइबर ठगी में प्रयुक्त मोबाइल नंबर, SMS, ई-मेल अथवा अन्य संचार माध्यमों की रिपोर्ट करना।
5. International Incoming Spoofed Calls Awareness
• भारत के नंबर के रूप में प्रदर्शित होने वाली अंतरराष्ट्रीय स्पूफ्ड कॉल के संबंध में जागरूकता एवं सुरक्षा संबंधी जानकारी प्राप्त करना।
6. सिटीजन अवेयरनेस
• साइबर सुरक्षा संबंधी परामर्श।
• मोबाइल एवं दूरसंचार सेवाओं के सुरक्षित उपयोग हेतु दिशा-निर्देश।
• विभिन्न प्रकार की साइबर धोखाधड़ी से बचाव संबंधी जानकारी।
बैठक के अन्य मुख्य बिंदु
उत्तराखण्ड में साइबर अपराधों की रोकथाम एवं दूरसंचार सेवाओं के दुरुपयोग पर प्रभावी नियंत्रण हेतु उत्तराखण्ड पुलिस एवं दूरसंचार विभाग (DoT) के मध्य समन्वय को और अधिक सुदृढ़ बनाने पर सहमति।
फर्जी एवं अनियमित सिम एक्टिवेशन पर प्रभावी रोक लगाने के लिए नीतिगत एवं तकनीकी सुधारों पर विस्तृत विचार-विमर्श।
संचार साथी (Sanchar Saathi), TAF-COP एवं CEIR (Central Equipment Identity Register) पोर्टलों के संबंध में आमजन के मध्य व्यापक जन-जागरूकता एवं प्रचार-प्रसार अभियान चलाए जाने पर बल दिया गया।
बैठक के अंत में अपर पुलिस महानिदेशक, कानून एवं व्यवस्था, उत्तराखण्ड द्वारा निर्देशित किया गया कि संचार साथी पोर्टल का राज्यभर में व्यापक प्रचार-प्रसार किया जाए तथा जन-जागरूकता अभियान संचालित कर आमजन को पोर्टल पर उपलब्ध सुविधाओं का अधिकाधिक उपयोग करने एवं साइबर अपराधों से सुरक्षित रहने के लिए जागरूक किया जाए।







