उत्तराखंड पुलिस विभाग में गजब : कांस्टेबल को सम्मान भी और सजा भी, 15 अगस्त का इंतजार

देहरादून : उत्तराखंड पुलिस विभाग से एक गजब का मामला सामने आया है। जहां एक कांस्टेबल को 15 अगस्त को सम्मानित करने का ऐलान किया और लिस्ट जारी की तो वहीं उसी कांस्टेबल को सजा भी दी गई वो भी पहाड़ चढ़ने की। आईये आपको बताते हैं पूरा मामला।

पुलिस मुख्यालय ने जारी की अधिकारियों-कर्मचारियों की लिस्ट

दरअसल पुलिस मुख्यालय से सोमवार को उन पुलिस अधिकारियों-कर्मचारियो की सूची जारी की गई थी, जिन्होंने अपनी ड्यूटी के दौरान शानदार काम किए। इनमें विभिन्न श्रेणियां बनाई गई हैं। लेकिन, एक श्रेणी कानून व्यवस्था में बेहतरीन काम करने वाले पुलिस कर्मियों की भी है। इस सूची में एक नाम ऐसा है, जिस पर सवाल खड़े हो रहे हैं। हालांकि, यह अब तक साफ नहीं हो पाया है कि यह गलती से हो गया या फिर जानबूझकर की गई गलती है।

8 सिपाहियों के ट्रांसफर

7 अगस्त को डीआईजी नीरू गर्ग के आदेश पर एक हरिद्वार जिले के 8 सिपाहियों के ट्रांसफर प्रशासनिक आधार पर पहाड़ के जिलों में किए गए हैं। इन पर ड्रग्स माफिया को मदद पहुंचाने के आरोप हैं। जांच के दौन इन कांस्टेबल के नंबर ड्रग्स माफिया की कॉल डिटेल में मिल हैं। इसी आधार पर उनके खिलाफ कार्रवाई भी गई है।

सम्मान कैसे दिया जा सकता है?

सवाल यह उठता है कि जो सिपाही ड्रग्स माफिया को पुलिस की मुखबरी करता हो, उसे सम्मान कैसे दिया जा सकता है? इस मामले में कुछ कांस्टेबल सस्पेंड भी किए जा चुके हैं। डीजीपी ने भी मामले को बहुत गंभीरता से लिया था। लेकिन, स्वतंत्रता दिवस के दिन सम्मानित होने वालों में सूची में हरिद्वार के कांस्टेबर हेमंत का नाम भी शामिल है।

ये है मामला

ज्वालापुर में एसटीएफ की टीम की ओर से नशा तस्करों पर की गई कार्रवाई के बाद चल रही जांच में कॉल डिटेल के आधार पर 8 पुलिसकर्मियों की ओर हिस्ट्रीशीटर नशा तस्कर से सांठगांठ सामने आई है। इन पुलिसकर्मियों को ट्रांसफर पहाड़ी जिलों में कर दिया गया है। आपको बता दें कि ज्वालापुर थाना क्षेत्र में एसटीएफ देहरादून की टीम ने 16 अप्रैल को छापा मारते हुए हिस्ट्रीशीटर सत्तार उसके भतीजे राहिल और एक महिला को गिरफ्तार किया था।

गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया था

इसके साथ ही नशा तस्करों से सांठगांठ रखने के आरोप में ज्वालापुर कोतवाली के सिपाही अमजद हुआ नारकोटिक सेल में तैनात सिपाही रईस राजा को भी गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया था इसके साथ ही दोनों पुलिसकर्मियों को सस्पेंड भी किया गया। डीजीपी ने जांच के आदेश दिए थे, जांच में 8 पुलिसकर्मियों के हिस्ट्रीशीटर सत्तार से फोन पर बात करने की जानकारी सामने आई है, जिसके बाद डीआइजी गढ़वाल नीरू गर्ग ने सभी का पहाड़ तबादल कर दिया है।

इनका हुआ ट्रांसफर

इस मामले पर एसएसपी सेंथिल अबुदई ने बताया कि हेड कांस्टेबल विकास बलूनी को चमोली, ज्वालापुर कोतवाली के सिपाही रविंद्र नेगी, मनमोहन को भी चमोली भेजा गया है। इनके अलावा हेमंत नारकोटिक्स सेल में तैनात सत्येंद्र चौधरी व अन्य थाना कोतवाली में तैनात विनोद, जयप्रकाश, हुकुम सिंह का ट्रांसफर रुद्रप्रयाग कर दिया गया है।

SSP पर सवाल

यह मामला बहुत गंभीर है। सवाल यह है कि जिले से लिस्ट भेजते वक्त एसएसपी ने इस बात का ख्याल क्यों नहीं रखा कि लिस्ट में किसका नाम भेजा जा रहा है। जबकि उनको पूरे मामले की जानकारी है। ड्रग्स मामले में एसएसपी के वाहन का ड्राइवर भी आरोपी है।

DIG गढ़वाल

डीआईजी गढ़वाल नीरू गर्ग ने कहा कि आवार्ड के लिए नाम जिले से भेज जाते हैं। इसमें मंडल मुख्यालय से चयन नहीं किया जाता है। मुख्यालय में नाम आने के बाद, वहीं से लिस्ट फाइनल की जाती है।

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